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कार्तिक मास में जप का मंत्र

कार्तिक मास में जप
कार्तिक मास में अपने गुरुदेव का सुमिरन करते ही जो "ॐ नमो नारायणाय" का जप करता है, उसे बहुत पुण्य होता है |

For Sun Worship ( सूर्योपासना )


सूर्योपासना
इस आदित्य देव की उपासना करते समय सूर्य गायित्री का जप करके अगर जल चढाते हो, और चढा हुआ जल जिस धरती पर गिरा, वहां की मिट्टी लेकर तिलक लगाते हो, और ताम्बे के लोटे में बचा हुआ जल, शेष घूँट भर बचा कर रखा हुआ जल, महा मृत्युंजय का जप करते ही पीते हैं तो आरोग्य की भी खूब रक्षा होती है; आचमन लेते समय उच्चारण करना होता है -

अकाल-मृत्यु-हरणं सर्व-व्याधि-विनाशनम
सूर्य-पादोदकं-तीर्थं जठरे धारयामि अहम्

यह श्लोक का अर्थ यह समझ लो की अकाल मृत्यु को हरने वाले सूर्य नारायण के चरणों का जल, मैं अपनी जठर में धारण करता हूँ...जठर, भीतर के रोगों को, और, सूर्य की कृपा बाहर के शत्रु-विघ्न आदि, अकाल मृत्यु आदि रोगों को हरे; सूर्य को अर्घ्य देते समय,

"ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात"

इस सूर्य गायित्री के द्वारा भी सूर्य नारायण को अर्घ्य देना विशेष लाभ-कारी माना गया है; नहीं तो ॐ सूर्याय नमः, ॐ रवये नमः, करके भी दे सकते हैं; ॐ सुर्याये नमः, ॐ आदित्याये नमः, ॐ अदित्याये विद्महे भास्कराए धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात, यह सूर्य गायित्री से सूर्य नारायण को अर्घ्य दें ; बाद में आँखें बंद करके सूर्य नारायण का भू-मध्य में ध्यान करते ही ॐकार का जप करने का बड़ा भारी महत्व है; क्योंकि सृष्टि का मूल ॐकार, परब्रह्म का वाचक है, और भगवान् सूर्य भी इसी ॐकार की उपासना से बड़ी पूर्णता की सामर्थ्य से सम्पान् होते हैं; यह ॐकार की मूल गायत्री; ओमकार, "ॐ आदित्याये नमः" में भी आदित्य में भी "ॐ" तो आया ही है; यह लिखा है शास्त्रों में सूर्य नारायण भी ओमकार की उपासना जप करते हैं, निरंतर विचरण करते रहते हैं

Mantra For Calibracy ( ब्रह्मचर्य का मंत्र)

ब्रह्मचर्य के लिए
एक बीज मंत्र है- "घं". इस मंत्र का जप करने से विकारी जीवन से रक्षा होती है।
- VCD- दिव्य प्रेरणा प्रकाश

Mantra For Long Life i.e. Mahamritunjya Mantra ( महामृत्युंजय-मंत्र )


महामृत्युंजय-मंत्र की महिमा और जपविधिः

भगवान मृत्युंजय के जप ध्यान से मार्कण्डेयजी, राजा श्वेत आदि के कालभयनिवारण की कथा शिवपुराण, स्कन्दपुराण-काशीखण्ड, पद्मपुराण-उत्तरखण्ड-माघमाहात्म्य आदि में आती है। आयुर्वेद के ग्रन्थों में भी मृत्युंजय-योग मिलते हैं। मृत्यु को जीत लेने के कारण ही इन मंत्रयोगों को 'मृत्युंजय' कहा जाता है।

साधक को चाहिए कि किसी पवित्र स्थान में स्नान, आचमन, प्राणायाम, गणेशस्मरण, पूजन-वन्दन के बाद तिथि वारादि का उच्चारण करते हुए संकल्प, करन्यास, हृदयदिन्नयास, ध्यानादि करके मंत्रजाप का प्रारम्भ करे।

इस मंत्र के जप में ध्यान परमावश्यक है। शिवपुराण में यह ध्यान इस प्रकार बतलाया गया हैः

हस्ताम्भोजयुगस्थकुम्भयुगलादुदधृत्य तोयं शिरः सिंचन्तं करयोर्युगेन दधतं स्वांके सकुम्भौ करौ। अक्षस्रंमृगहस्तम्बुजगतं मूर्धस्थचन्द्रस्रवत्। पीयूषार्द्रतनुं भजे सगिरिजं त्र्यक्षं च मृत्युंजयम्।।

(सतीखं. 38.24)

'भगवान मृत्युंजय के आठ हाथ हैं। वे अपने ऊपर के दोनों करकमलों से दो घड़ों को उठाकर उसके नीचे के दो हाथों से जल को अपने सिर पर उड़ेल रहे हैं। सबसे नीचे के दो हाथों में भी घड़े लेकर उन्हें अपनी गोद में रख लिया है। शेष दो हाथों में वे रूद्राक्ष की माला तथा मृगी-मुद्रा धारण किये हुए हैं। वे कमल के आसन पर बैठे हैं और उनके शिरःस्थ चन्द्र से निरन्तर अमृतवृष्टि के कारण उनका शरीर भीगा हुआ है। उनके तीन नेत्र हैं तथा अन्य मृत्यु को सर्वथा जीत लिया है। उनके वामांगभाग में गिरिराजनन्दिनी भगवती उमा विराजमान हैं।'

इस प्रकार ध्यान करके रूद्राक्षमाला से इस महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप करना चाहिए।

हौं जूँ सः। भूर्भुव स्वः। त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्व्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूँ हौं ॐ।

सर्वव्याधिनाश के लिए लघु मृत्युंजय-जपः

ॐ जूँ सः (नाम, जिसके लिया जाय) पालय पालय सः जूँ ॐ।

इस मंत्र का 11 लाख जप तथा एक लाख दस हजार दशांश जप करने से सब प्रकार के रोगों का नाश होता है। इतना न हो तो कम-से-कम सवा लाख जप और साढ़े बारह हजार दशांश जप अवश्य करना चाहिए।

Mantra For Good Health ( स्वास्थ्य-मंत्रः )

स्वास्थ्य का मंत्रः

प्रतिदिन सुबह-शाम स्वास्थ्य के मंत्र की पाँच-पाँच मालाएँ अर्थात् कुल दस मालाएँ करें। यह मंत्र अनुभवसिद्ध एवं प्रभावशाली है। सामान्य व्यक्तियों एवं पापी, कृतघ्न, निगुरे, व्यसनी, नास्तिक, श्रद्धारहित लोगों को यह मंत्र कदापि न बतायें। ऐसे लोगों को यह मंत्र बताने से बतानेवाले को दोष लगता है। स्वास्थ्य का मंत्र इस प्रकार हैः
ॐ हंसं हंसः

श्री गुरुदेव का ध्यान करके यह मंत्र जपें।

आश्रम की 'इष्टसिद्धि' पुस्तक में एक अन्य मंत्र भी दिया है। सिर के ऊपर हाथ रखकर उस मंत्र का 108 बार जप करने से समस्त रोग दूर हो जाते हैं। वह मंत्र इस प्रकार हैः

अच्युतानन्त गोविन्द नामोच्चारण भेषजात्। नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।

'हे अच्युत! हे अनंत! हे गोविन्द!' इन नामों के उच्चारणरूपी औषधि से सब रोग नष्ट हो जाते हैं। मैं यह सत्य कहता हूँ..... सत्य कहता हूँ।'
(धन्वंतरि)

Mantra For Getting Rid Of Evil Spirits ( भूत-प्रेत भगाने का मंत्रः )

भूत-प्रेत भगाने का मंत्रः

ॐ नमो भगवते रूरू भैरवाय भूतप्रेत क्षय कुरू कुरू हूं फट् स्वाहा।

विधिः एक कटोरी में भरे हुए शुद्ध जल को निहारते हुए इस मंत्र का दस हजार जप करें। वह जल भूतप्रेतादि से प्रभावित व्यक्ति को पिला देने से भूतप्रेतादि भाग जायेंगे। एक ही स्थान में बैठकर एक ही समय में मंत्रजप करने से अधिक लाभ होगा।

Tips And Mantras For Acquiring Wealth ( आर्थिक फायदा )

* गो-झरण से स्नान कराने से रोग नष्ट होंगे पाप नष्ट होंगेस्नान में गो-झरण डालेपंचगव्य से स्नान करने से पापनाशिनी उर्जा मिलती है

कभी बिलि के पत्ते से स्नान करो , कभी उबटन का स्नान करो..कभी गो-झरण का स्नान करो तो कभी दही लगा के स्नान करोदही लगाके स्नान करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है ..ये सभी शरीर के लिए है….शरीर स्वस्थ रख के अंतरात्मा में आने के लिए ये सब है|


* आर्थिक परेशानी हो, तो सतत शुक्रवार महा-लक्ष्मी के मन्दिर में धूप-दीप दान करें; अपना पुरुषार्थ भी करें, लाभ होगा |


* नूतन वर्ष के दिन (दीपावली के अगले दिन ), गाय के खुर की मिट्टी से, अथवा तुलसीजी की मिट्टी से तिलक करें, सुख-शान्ति में बरकत होगी |


* पूजा के स्थान पर मोर-पंख रखने से लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है |


* तुलसी के पौधे के आगे शाम को दिया जलाने से लक्ष्मी वृध्ही में मदद मिलती है; गुरुदेव ने यह भी कहा की लक्ष्मीजी को कभी तुलसीजी नहीं चढाई जाती, उनको कमल चढाया जाता है |


* दीपावली के दिन लौंग और इलाइची को जलाकर राख कर दें; उस से फिर गुरुदेव (की फोटो) को तिलक करें; लक्ष्मी-प्राप्ति में मदद मिलती है, बरकत होती है |


* दीपावली की संध्या को तुलसी जी के निकट दिया जलायें, लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने में मदद मिलती है; कार्तिक मास में तुलसीजी के आगे दिया जलाना पुण्य-दाई है, और प्रातः-काल के स्नान की भी बड़ी भारी महिमा है |


* कार मन्त्र का ६० दिन अनुष्ठान किया, सूर्य नारायण को सफेद गाय के ढूध से बनी खीर का भोग लगाया तो जन्मो का दरिद्रता नष्ट हो जाती है |


* दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन करना, धन -संपत्ति रहे..लेकिन लक्ष्मी आए तो धन संपत्ति का उपयोग केवल भोग वासना से पाशवी जीवन में उड़ाने के लिए नही करे,अपने जीवन में संयम , सदाचार, परदुख कातरता हो , अपनी आवश्यकता पूर्ति हो , लोक कल्याण में तन, धन लगे, पुरुषार्थ एवं उद्योग से लक्ष्मी प्राप्त होती है, सत्कर्म और दान-पुण्य से बढ़ती है, तथा संयम से सावधानी से लक्ष्मी स्थायी होती है |


* भविष्योत्तर पुराण मे आता है कि , जेष्ठ ये लक्ष्मी की बहन हैलक्ष्मी जी शनिवार को बहन को मिलने आती है…. जेष्ट उर्फ दरिद्रताइसलिए शनिवार को दूध आदि से पीपल के वृक्ष का पूजन, परिक्रमा करते है..तो पूजन करनेवाले जेष्ठ नहीं रहते श्रेष्ठ हो जाते है…. |हर शनिवार को दूध, पानी, काले तिल और फूल (गेन्दे के फूल) चूर के पीपल के मूल में ड़ाल दे और पीपल के 5/7 फेरेफिरे | इसलिए आश्रम मे शनिवार के दिन बहुत शधक पीपल-बादशाह की परिक्रमा करते हैपीपल वृक्ष पे बापूजी ने शक्तिपात भी किया है


*
हुं विष्णवे नमः

निरोगी श्री सम्पन्न होने के लिये इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें, तो आरोग्यता और सम्पदा आती हैं


* अपने जीवन से विषाद को भगाने का पक्का इरादा करलो; और दरिद्रता भगानी हो तो फालतू खर्च करो, व्याज भरकर गाडियाँ और मकान बनाओ, और आय को बढाना हो, अथवा, बरकत लानी हो, तो एक मन्त्र बताता हूँ, ११ माला कुछ दिन तक जप करो, फिर 21बार जप करके पानी में देखो, और, बाँया नथुना चले, बाँया स्वर चले, दाँया नथुना बन्द करके वह पानी पी लिया करे|
ऐसे भी कोई पेय वस्तु दाँया नथुना चले तब पीते हैं, तो धातु कमज़ोर रहता है; अगर दाँया नथुना बंद करके बाँये नथुने से श्वास चलाकर पीते हैं, तो धातु मजबूत रहता है, तो ओज और बल बढ़ता है | मंत्र है -

अच्युताय नमः

Om Achyutaaya Namah

जिसका पद कभी च्युत नहीं होता, इन्द्र पद भी च्युत हो जाता है, ब्रह्माजी का पद भी च्युत हो जाता है, लेकिन फिर भी, जो च्युत नहीं होते, अपने स्वभाव से, अपने आप से, वह परमेश्वर अच्युत को हम नमस्कार करते हैं...अच्युतम केशवं राम नारायणं..."
अच्युताय नमः - ११ माला जप करें कुछ दिन, फिर गुरूवार को २१ बार जप करे, और गुरूवार से गुरूवार तक ११ मालायें जप करे; गुरूवार करे, गुरूवार करे, मतलब सप्ताह, सप्ताह - " अच्युताय नमः, अच्युताय नमः..." - कुछ ही दिनों में यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा, फिर, २१ बार जप करके वह पानी पिए |


* जन्मों की दरिद्रता दूर करने के लिए --
सप्ताह, १००० बार "" का जप करें और चावल और देशी गाय के दूध की खीर बनाकर सूर्यनारायण को भोग लगायें, इससे जन्मों की दरिद्रता चली जाती है |

* इतवार को बिना नमक के भोजन करने को कहा गया है | ऐसा कुछ समय तक करने से दरिद्रता दूर होती है, इसमें शंका नही |


* घर में समृद्धि लाना चाहते हो तो जिस घर के पुरुष काम पर जाते हों तो घर की महिलाएँ, जब पुरुष काम पर जायें तब गीता के 11 वें अध्याय का 40 वां श्लोक 108 बार पढ़ें और भगवान से प्रार्थना करें कि मैंने ये जो पाठ किया है इसका पुण्य हमारे घर के अमुक-अमुक पुरुष को ( उनका नाम लेकर) दीजिये उन्हें कार्य खूब सफलता मिल ऐसी प्रार्थना करके अर्घ्य दें इससे घर के काम करने वाले व्यक्ति को बहुत सफलता मिलेगी यह कई लोगों का अनुभव है इस श्लोक की इतनी महिमा है और इतना सरल भी है |


* आर्थिक फायदा नहीं होता है तो दुकान पे जाने से पहले झंडु (गेंदे के फूल/मेरी गोल्ड) के फूल की कुछ पंखुड़ियाँ, हल्दी और चंदन में घिस करतिलक करें गुरुमंत्र का जप करें फिर दुकान पे जायें तो कोई ग्राहक खाली हाथ नहीं जायेगा, आर्थिक लाभ बढ़ेगा |गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करके जायें, कर्जा है तो उतरजायेगा |


* Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), light Dhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

lakshmi prapti mantra

om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|

ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture of Lakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).

Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.